दोस्त की गर्लफ्रेंड को पेला – Hindi Sex Story

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Hindi Sex Story में पढ़ें कि कैसे मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड ने डिल्डो से मेरी गांड मारी. वो मुझसे काफी घुली मिली हुई थी. एक दिन हम दोनों में अजीब सी बात हुई.

दोस्तो, मेरा नाम विक्की है. मेरी यह घटना एक वास्तविक घटना है जो मेरे साथ घटी है।
जिसके साथ मेरा ये वाकया हुआ उसकी इजाजत के बाद मैं इसे आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं।

मेरे एक दोस्त की गर्लफ्रेंड थी. उसका नाम रोशिता था। तब वो 21 साल की थी. उसके दूध बहुत मस्त थे. मुझे उसकी गांड बहुत अच्छी लगती थी।
वो उसकी 2 सहेलियों के साथ रतलाम में रहती थी.

एक दिन हम दोनों अकेले बैठे थे. उसकी सहेलियां उनके गांव गई थी। वो मुझसे काफी घुली मिली हुई थी.
हम दोनों ऐसे ही बातें कर रहे थे.

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तभी सामने गली में से दो हिजड़े जाते हुए दिखाई दिये हमें. वो लोग एक दुकान के सामने नाचने लगे.
कुछ देर तो हमारा भी मनोरंज होता रहा.

फिर उनके जाने के कुछ देर बाद रोशिता ने पूछा- भैया, क्या इनके पास भी वो होता है जो बाकी सब लड़कों के पास होता है?
वो मुझे भैया ही कहती थी लेकिन हम दोनों गहरे दोस्तों के जैसे थे.

मैं उसकी बात पर ठहाका मारकर हंस पड़ा.
मैं बोला- मैंने क्या देखा है उनका जो तू मुझसे इतनी उम्मीद के साथ पूछ रही है? मुझे नहीं पता … शायद होता होगा।

फिर थोड़ी देर वो चुप हो गई.
मैं बोला- क्या पता ये लोग नकली लगाकर घूमते हों?
वो बोली- नहीं, ये क्या बात है, नकली कैसे लगेगा? और लग भी गया तो उसके साथ वो सारी चीजें तो नहीं हो सकती जो असली के साथ होती हैं.

मैं बोला- तुझे क्या करना है उसका जो तू इतनी रूचि लेकर पूछ रही है?
वो बोली- कुछ नहीं. मैं तो बस उत्सुक थी कि लड़कों को पता नहीं कैसा फील होता होगा.

मैं बोला- अगर तुझे भी फील करना है तो नकली लगाकर देख ले.
ये कहकर मैं जोर से हंसने लगा.

उसके बाद कुछ दिन तक वो इस बारे में कुछ नहीं बोली.

एक दिन अचानक वो कहने लगी- भैया मुझे नकली लगाकर देखना है कि कैसा लगता है?

मैंने उसकी तरफ हैरानी से देखा.
वो भी मेरी जिप की ओर देखते हुए फिर से बोली- मुझे भी देखना है कि लगाने के बाद कैसा लगता है?
मैंने फिर पूछा- तू सच में लगाकर देखना चाहती है, सीरियसली बिल्कुल?

वो बोली- हां, मैं मजाक नहीं कर रही.
फिर मैं सोच में पड़ गया और बोला- ठीक है, मैं तेरे लिए उसका इंतजाम तो कर दूंगा लेकिन तू उसको लगाकर रोमांस किसके साथ करना चाहती है?

उसने कहा- मेरी सहेलियां तो गांव में गयी हुई हैं. अगर आप मेरी मदद करो तो?
मैंने कहा- सटक गयी है क्या बुद्धि तेरी? मेरे पास वो पहले से है. मैं कैसे मदद करूंगा तेरी?

वो बोली- तो क्या हुआ. आप मेरे लिए कुछ देर लड़की नहीं बन सकते?
मैं अब सच में हैरान था कि ये लड़की क्या बोले जा रही है.
मुझे शक तो हुआ कि दाल में जरूर कुछ काला है.

फिर मैंने उसकी बात मान ली.
मगर मैंने एक शर्त रख दी और कहा- मैं एक ही शर्त पर ये काम करूंगा.
वो बोली- हां बताओ, क्या शर्त है आपकी?
मैंने कहा- मुझे तुम्हारी सहेलियों में से किसी एक के साथ एक रात चाहिए होगी. अगर वो राजी नहीं होती हैं तो फिर मैं तेरे साथ ही करूंगा.

वो सोच में पड़ गयी और बोली- ठीक है, मैं इंतजाम कर दूंगी. आप उसकी फिक्र न करो.

उसके अगले ही दिन हम बाजार गए और मेरे लिए ब्रा-पैंटी, साड़ी, ब्लाउज और सारे मेकअप का सामान ले आए.
शाम को खाना खाने के बाद हम दोनों बारी बारी से बाथरूम में नहाने गए.

नहाने के बाद मैंने ब्रा और पैंटी पहनी और उसे अपनी अंडरवियर और बनियान पहनाई.
रोशिता ने मुझे लहँगा पहनाया. फिर ब्लाउज और साड़ी पहनाई; जिसके बाद मैंने नकली लम्बे बालों वाली विग पहनी.

पैरों में मैंने पायल पहन ली और हाथों में चूड़ियां.
रोशिता ने मेरा पूरा मेकअप किया. उसने मेरे होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक लगाई. उसके बाद अब रोशिता की बारी थी.

मैंने उसकी कमर में डिल्डो बांधा और फिर उसको शर्ट और पैंट पहना दी.
उसके बालों को मैंने पीछे बांध दिया.

वो खुद को लड़का महसूस कर रही थी.
फिर जब मैंने खुद को आईने में देखा तो मैं बिल्कुल औरत बन गया था.

मुझे अपने इस रूप पर हैरानी हो रही थी. मैं पूरी औरत लग रहा था.

फिर हमने एक मोमबत्ती जलाई और उसके पास बैठ गए।
रोशिता ने मेरी मांग भरी और मंगलसूत्र पहनाया।

उसके बाद मैं बेडरूम में जाकर बैठ गया.

फिर रोशिता आई और उसने मेरा घूंघट खोला. मैंने वही नाटक किये जो एक दुल्हन सुहागरात के दिन करती है.
शादी तो नहीं हुई थी लेकिन फिल्मों में खूब देखा था.

फिर रोशिता ने मेरा घूंघट उठाया और मुझे लेकर बेड पर लेटती चली गयी.
मैं भी लेट गया उसके साथ.

वो मेरे होंठों को चूमने लगी. मैं भी उसके होंठों को चूसने लगा. मैं उसका पूरा साथ दे रहा था.

उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी गर्दन और पीठ पर चूमने लगी.

उसका डिल्डो मेरी गांड पर टच हो रहा था.
मुझे बहुत ही रोमांच महसूस हो रहा था.
ऐसा मैंने पहले कभी नहीं किया था.

उसके बाद वो मेरे लहंगे को उठाने लगी. उसने मेरा लहंगा उठाया और मेरी गांड पर हाथ फेरा.
उसके बाद उसके हाथ मेरी पैंटी में अंदर घुसने की कोशिश करने लगे और वो मेरे चूतड़ों को सहलाने लगी.

फिर उसकी उंगली ने मेरी गांड की दरार में से पैंटी हटाई और उसकी उंगली मेरी गांड के छेद में घुसने की कोशिश करने लगी.

मैंने भी हल्की सी टांगें ढीली करके खोल दीं और उसकी उंगली मेरी गांड में घुस गयी.

अब मैंने पूरी लड़की बनकर कहा- आह्ह राजा … मैं तुम्हारी रानी हूं. मुझे जी भरकर प्यार करो.
रोशिता- हां मेरी जान … आज मैं तेरी जन्मों की प्यास बुझा दूंगी.

मैं- मगर तुम मुझे नंगी मत करना. मेरे कपड़े मत निकालना.
रोशिता- तो फिर मैं तेरी मारूंगी कैसे?
मैं- लहँगा ऊपर कर देना और पैंटी निकाल देना.

रोशिता- अच्छा, मेरी जान … जरा इसको प्यार करो.
मैं- इसको किसको?
रोशिता अपने हाथ से डिल्डो की तरफ इशारा करते हुए बोली.

मैं- नहीं, पहले इसका नाम लोगी तो ही करूंगा.
रोशिता- ठीक है … मेरे लण्ड को चूसो.

रोशिता के मुंह से लन्ड शब्द सुनते ही मैंने उस डिल्डो को अपने मुंह में ले लिया और चूसना चालू कर दिया.

थोड़ी देर चूसने के बाद उसने मुझे उल्टा लिटा दिया. फिर लहँगा ऊपर करके मेरी पैंटी निकाल दी।

उसने मेरी गांड को देखा और उसका छेद सहलाने लगी. उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं.

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उसको मेरी गांड सहलाने से कुछ ज्यादा ही अच्छा लग रहा था.
अच्छा तो मुझे भी बहुत लग रहा था.

फिर उसने मेरी गांड पर तेल लगाना शुरू कर दिया.
तेल लगाकर उसने गांड अंदर तक चिकनी कर दी.

फिर वो मेरी गांड में अपनी चिकनी उंगली सरकाने लगी.
उंगली को गांड में अंदर बाहर करते हुए वो मेरी गांड को चोदने लग गयी.

मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

कुछ देर तक उसने मेरी गांड में उंगली की.
फिर वो पैंट निकाल कर मेरे ऊपर आ गयी.

डिल्डो के सुपारे को वो मेरी गांड के छेद पर लगाकर रगड़ने लगी.
मुझे अच्छा लगने लगा.
मगर अंदर ही अंदर मेरे भीतर एक डर भी था.

मैंने अभी तक गांड में कभी कुछ नहीं लिया था.
आज मेरी गांड में एक मोटा लम्बा रबड़ का डिल्डो जाने वाला था.
ये हमला भी उसने अचानक ही किया.

उसके एकदम से मेरे छेद पर लंड का धक्का मारा और वो नकली लंड मेरी गांड को खोलता हुआ अंदर जा घुसा.
मैं तो दर्द से बिलबिला उठा. बाप रे … इतना दर्द होता है गांड चुदाई में!!

मेरा चेहरा लाल हो गया और मैं रोने ही वाला था.
मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं उसको हटाने लगा.

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तभी उसने मेरे हाथ पकड़ लिये और बोली- अगर आपने चीटिंग की तो मैं आपकी शर्त पूरी नहीं करूंगी. अब तो वैसे भी गांड में जा ही चुका है. अब काम पूरा करने दो.

फिर मैंने अपने हाथ रोक लिये. मगर दर्द के मारे मेरी जान निकल रही थी.
थोड़ी देर रुकने के बाद रोशिता ने नकली लंड का एक और झटका मारा. अब उसने जोर लगाकर पूरा डिल्डो मेरी गांड में डाल दिया।

मैं दर्द के मारे छटपटाने लगा जैसे कि मछली पानी से बाहर निकाले जाने पर छटपटाने लगती है.
मगर उस बेरहम लड़की ने मेरी कुंवारी गांड पर कोई रहम नहीं किया.

वो मेरी पीठ को चूमने लगी. मेरे गालों को चूमने लगी और डिल्डो को घुसाये रही.
फिर मुझे किस करते हुए वो डिल्डो को मेरी गांड में चलाने लगी.

अब वो नकली लंड मेरी गांड में अंदर बाहर हो रहा था और मेरा छेद फटा जा रहा था.

मैं सोच रहा था कि मैं ये कहां फंस गया. सब मेरी ही गलती थी.
अब मेरी गांड में डिल्डो था और मैं कुछ नहीं कर सकता था.

रोशिता मेरी गांड चोदने लगी.

कुछ देर तो मुझे बहुत गंदा दर्द हुआ लेकिन फिर मजा आने लगा. मैं अब आराम से चुदने लगा.
पता नहीं क्यों मुझे ये सब अब अच्छा लग रहा था.

लड़की मुझे चोद रही थी. मेरा भी लंड खड़ा हो गया था.

रोशिता अब उस डिल्डो को मेरी गांड के पूरा अंदर बाहर करने लगी।
अब मैं मस्ती में आ गया था. मैं खुद ही गांड को एडजस्ट करके पूरा डिल्डो ले रहा था. मेरे मुंह से आह्ह … आह्ह की आवाजें आ रही थीं.

आज मेरी गांड की सील टूट चुकी थी. मुझे अब बहुत मजा आ रहा था मेरी गांड मरवाते हुए।
रोशिता भी मुझे जोर जोर से चोद रही थी।
अब मैं पूरी औरत ही महसूस कर रहा था क्योंकि एक मर्द जैसे लंड से मेरी चुदाई भी हो रही थी.

मैं- चोदो मुझे … जोर से! आह्ह … चोदो!
रोशिता- जान … तेरी गांड आज फाड़ देनी है मैंने!
मैं- अब तो ये तुम्हारी है मेरे दूल्हे राजा.
रोशिता- रुक तो … फिर मैं स्पीड बढ़ाती हूं.

रोशिता मेरी गांड में जोर जोर से पेलते हुए चोदे जा रही थी.
अब उसकी स्पीड सच में तेज हो गयी थी और मुझे मेरी गांड में दर्द सा होने लगा था. मैं जोर जोर से कराहटें ले रहा था.

कुछ देर वो चोदती रही और फिर मुझे उसने घोड़ी की पोजीशन में कर लिया.
वो पीछे घुटनों पर खड़ी होकर मुझे चोदने लगी.
मैं सिसकारियाँ ले रहा था.

थोड़ी देर तक उसने मुझे घोड़ी की तरह चोदा.
मेरी गांड चुदाई करते हुए वो एक हाथ से मेरा लन्ड भी हिला रही थी.

मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था. अब मुझे जरा भी दर्द नहीं हो रहा था.
रोशिता का हाथ मेरे लंड पर लगातार चल रहा था.

मुझे इतनी उत्तेजना हो गयी कि मेरा लंड फटने को हो गया और मैंने एकदम से वीर्य छोड़ दिया.
उसके हाथ में मेरा वीर्य लग गया. उसने वो हाथ अपने मुंह में लेकर चाट लिया और अपना हाथ साफ कर लिया.

अब चूंकि मेरा वीर्य निकल गया तो मैं शांत हो गया. रोशिता की चूत तो चुदी नहीं थी इसलिए वो तो अभी संतुष्ट नहीं थी लेकिन उसको मेरी गांड चोदने की संतुष्टि और मेरे लंड के वीर्य का स्वाद तो मिल ही गया था.

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आज मेरी गांड का कुंवारापन खत्म हो गया था.

करीब आधे घण्टे तक उस रात रोशिता ने मुझे पहली बार चोदा था.
रात भर में फिर 3 बार उसने मेरी गांड बजाई।
उसने मेरा लन्ड भी चूसा।

मेरे लिये यह एक बिल्कुल नया डिल्डो अनुभव था. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपनी गांड चुदाई भी कभी करवा लूंगा.
मगर ये सच था. मेरी गांड चुदाई हो गयी थी.

अब बारी थी रोशिता की, उसके किये वादे को निभाने की.
उसने अपना वादा कैसे निभाया और उसने किस सहेली की चूत दिलवाई या वो खुद ही मेरे लंड से चुदी?
वो घटना मैं आपको अपनी किसी अलग स्टोरी में बताऊंगा.

आप इस डिल्डो कहानी के बारे में क्या विचार रखते हैं? क्या किसी पुरूष मित्र को भी मेरे जैसा अनुभव है जिसने कभी किसी लड़की से गांड चुदवाई हो? यदि है तो मुझे जरूर बतायें.

 

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